Jatamansi / (जटामांसी)

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हिंदी और संस्कृत में जटामांसी को भूतजटा, तपस्विनी या बालछड़ भी कहा जाता है। साधु-संतों की जटा जैसी दिखने के कारण इसका नाम ‘जटामांसी’ पड़ा है।सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य, यज्ञ या हवन में जटामांसी की सूखी जड़ों को आहुति के रूप में समर्पित किया जाता है। इससे यज्ञ अत्यधिक शक्तिशाली और फलदायी बनता है।नकारात्मकता का नाश (भूतघ्न): पूजा पद्धतियों में इसे ‘भूतघ्न’ (बुरी शक्तियों को दूर करने वाला) माना गया है। इसकी सुगंध से घर की नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नजर और दोष समाप्त होते हैं।देवताओं की प्रिय औषधि: यह दिव्य जड़ी-बूटी भगवान शिव (महादेव) और भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। सावन के महीने में या विशेष तांत्रिक अनुष्ठानों में महादेव को अर्पित करने से मानसिक शांति मिलती है।

सनातन धर्म में किसी भी शुभ कार्य, यज्ञ या हवन में जटामांसी की सूखी जड़ों को आहुति के रूप में समर्पित किया जाता है। इससे यज्ञ अत्यधिक शक्तिशाली और फलदायी बनता है।नकारात्मकता का नाश (भूतघ्न): पूजा पद्धतियों में इसे ‘भूतघ्न’ (बुरी शक्तियों को दूर करने वाला) माना गया है। इसकी सुगंध से घर की नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नजर और दोष समाप्त होते हैं।देवताओं की प्रिय औषधि: यह दिव्य जड़ी-बूटी भगवान शिव (महादेव) और भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। सावन के महीने में या विशेष तांत्रिक अनुष्ठानों में महादेव को अर्पित करने से मानसिक शांति मिलती है।

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