panchratan ( पंचरत्न )

20.00

हिंदू धर्म और पूजा अनुष्ठानों में पंचरत्न (पांच पवित्र रत्न) का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार, कलश स्थापना, भूमि पूजन, हवन और गृह प्रवेश के समय कलश या भूमि के अंदर पंचरत्न डालना अत्यंत शुभ माना जाता है, जिससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और सुख-समृद्धि का वास होता है।

यहाँ पूजा में उपयोग होने वाले मूल पंच रत्नों के नाम और उनका हिंदी विवरण दिया गया है:1. कनकम् (स्वर्ण / सोना – Gold)विवरण: प्राचीन पद्धतियों में सोने (Gold) को सबसे शुद्ध धातु और रत्न के रूप में गिना जाता है। यदि पूजा में अन्य रत्न न मिलें, तो केवल स्वर्ण रखना भी पर्याप्त माना जाता है।धार्मिक महत्व: यह भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का प्रतीक है, जो समृद्धि और ऐश्वर्य लाता है।2. हीरकम् (हीरा – Diamond)विवरण: यह शुक्र ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। पूजा पैकेटों में इसके स्थान पर स्फटिक या सफेद रंग के उपरत्न का प्रयोग भी किया जाता है।धार्मिक महत्व: यह जीवन में सुख, सौंदर्य, मानसिक स्पष्टता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।3. नीलमणि (नीलम – Blue Sapphire)विवरण: यह गहरे नीले रंग का रत्न है जो शनि ग्रह से जुड़ा हुआ है।धार्मिक महत्व: पूजा में इसका उपयोग अनुशासन, ध्यान और बुरी शक्तियों या नजर दोष से रक्षा के लिए किया जाता है।4. पद्मराग (माणिक्य / रूबी – Ruby)विवरण: पद्मराग या माणिक्य लाल रंग का बहुमूल्य रत्न है, जो सूर्य देव का प्रतिनिधित्व करता है।धार्मिक महत्व: यह आत्मा की शुद्धि, साहस, यश, उत्तम स्वास्थ्य और जीवन शक्ति का प्रतीक है।5. मौक्तिकम् (मोती – Pearl)विवरण: समुद्र से निकलने वाला यह सफेद चमकीला रत्न चंद्रमा का प्रतीक है।धार्मिक महत्व: यह मन को शांति प्रदान करता है, भावनाओं को संतुलित करता है और पूजा स्थल में पवित्रता का वातावरण बनाता है।

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