कथा के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए बाल्यावस्था में हिमालय पर्वत पर अत्यंत कठिन तपस्या की थी। उनके पिता, पर्वतराज हिमालय, पार्वती का विवाह उनकी इच्छा के विरुद्ध भगवान विष्णु से करना चाहते थे। जब पार्वती की सहेलियों को इस बात का पता चला, तो उन्होंने पार्वती का अपहरण (हरत) किया और उन्हें एक घने जंगल की गुफा (आलिका) में छिपा दिया—इसी वजह से इस व्रत का नाम ‘हरतालिका’ पड़ा। वहां माता पार्वती ने रेत का शिवलिंग बनाकर निराहार और निर्जला रहकर व्रत किया। उनकी इस अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया।
Hartalika Vrat Katha books ( हरतालिका व्रत कथा )
₹30.00
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